पराली जलाने की घटनाओं पर शत प्रतिशत रोक लगाएं अधिकारी : डीसी
डीसी प्रीति ने कहा कि धान कटाई का सीजन शुरू होने वाला है। धान कटाई के बाद कुछ किसान धान के बचे अवशेषों को आग लगा देते हैं। जो प्रदूषण का बड़ा कारण बनता है। एनजीटी द्वारा इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा भी फसल अवशेष प्रबंधन के लिए अनेक योजनाएं क्रियान्वित की हैं। मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए सभी संबंधित विभागों के अधिकारी अपने अपने क्षेत्र में पैनी नजर रखें और पराली जलाने के घटनाओं पर इस बार शत प्रतिशत अंकुश लगाएं। ग्राम स्तर पर गठित टीमों की जवाबदेही तय की जाए। डीसी प्रीति शुक्रवार को लघु सचिवालय स्थित सभागार में फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर संबंधित अधिकारियों की बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहीं थीं। डीसी ने कहा कि संवेदनशील गांवों में स्कूल व कॉलेजों में गतिविधि चलाकर जागरूकता पैदा करें। किसानों को समझाएं कि फसल अवशेष जलाने से जहां हमारी मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कमजोर होती है, वहीं पर्यावरण को भी नुकसान होता है। डीसी ने डीडीए को निर्देश दिए कि ग्राम स्तर पर जितने में कस्टम हायरिंग सेंटर बने हुए हैं, उनके नंबर संबंधित एसडीएम, बीडीपीओ तथा ग्राम सचिव के साथ शेयर करें, ताकि सभी किसानों इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने डीडीपीओ को निर्देश दिए कि सभी गांव में फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर ग्राम सभा आयोजित की जाए। उन्होंने बताया कि जिले में एक लाख 76 हजार हेक्टयर में धान की फसल लगाई गई है। पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए पंचायत विभाग, राजस्व विभाग, कृषि विभाग, पुलिस और अन्य विभागों के अधिकारी व कर्मचारी आपसी तालमेल के साथ काम करें। इस कार्य में पुलिस भी अपनी अहम भूमिका निभाए। गांव में पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे पराली को जलाने के बजाए इसे या तो जमीन में मिला दें या इसकी गांठे बनाकर बेच दें। जिला में कई ऐसी इंडस्ट्री हैं, जो पराली की खरीद करती हैं। अगर कोई पराली जलाने की घटना सामने आती है तो जुर्माना लगाने के साथ साथ नियमानुसार अन्य कार्रवाई भी की जाएगी। इस अवसर पर कैथल एसडीएम अजय सिंह, कलायत एसडीएम अजय हुड्डा, सीटीएम गुरविंद्र सिंह, डीएसपी बीरभान, कृषि एवं कल्याण विभाग कैथल के उपनिदेशक डा. कर्मचंद, डीआरओ चंद्रमोहन, डीएफएसई निशांत राठी, डीडीपीओ रितु लाठर सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
रेड एंट्री वाले किसानों के नाम ग्राम सचिवालय व मंडी में किए जाएं प्रदर्शित
डीसी प्रीति ने कहा कि जो लोग फसल अवशेष जलाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार एफआईआर, जुर्माना तथा रेड एंट्री की जाए। पिछले वर्ष जितने लोगों की राजस्व रिकार्ड में रेड एंट्री की गई थी, उनके नाम सभी गांव के ग्राम सचिवालय तथा मंडियों में प्रदर्शित किए जाएं, ताकि उन्हें अपनी गलती का एहसास हो।
आगजनी की सूचना देने के लिए बनाया कंट्रोल रूम
कृषि एवं कल्याण विभाग कैथल के उपनिदेशक डा. कर्मचंद ने बताया कि पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन सजग है। इसको लेकर जिला स्तर पर एक कंट्रोल रूम में भी स्थापित किया गया है, जिसमें कोई भी आमजन पराली जलने के संबंध में 01746-235756 पर सूचना दे सकता है। सूचना देने वाला का नाम गुप्त रखा जाएगा।
ग्राम स्तर पर बनाई टीमें-कृषि एवं कल्याण विभाग कैथल के उपनिदेशक डा. कर्मचंद ने बताया कि ग्राम स्तर पर सरपंच, नंबरदार, चौकीदार व एक सरकारी अधिकारी/कर्मचारी की टीम बनाई गई है। जो गांव में पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखेगी। इसके अलावा किसानों को फसल अवशेषों का प्रबंधन करने के लिए सरकार द्वारा अनुदान पर मशीनें उपलब्ध करवाई गई हैं। जिनकी सहायता से किसान फसल अवशेष का उचित प्रबंधन करके अपनी आय बढ़ा सकता है।
