हरियाणा सरकार के अथक प्रयासों से आज सरस्वती नदी में 400 किलोमीटर तक बह रहा पानी : धुम्मन सिंह किरमच
हरियाणा सरस्वती हरिटेज बोर्ड के उप-चेयरमेन धुम्मन सिंह किरमच ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मार्गदर्शन में सरस्वती नदी को जीवित रखने के लिए अनेक विकास कार्य किए जा रहे है। हरियाणा में जहां-जहां से सरस्वती नदी गुजरती है वहां पर बने मंदिरों, घाटों के सौंदर्यकरण का कार्य किया जा रहा है। इन विकास कार्यो का मुख्य उद्देश्य आमजन को धार्मिक बढ़ावा देने के साथ-साथ सुविधाएं प्रदान करना है। हरियाणा सरस्वती हरिटेज बोर्ड के उप-चेयरमेन धुम्मन सिंह किरमच मंगलवार को हरियाणा-पंजाब बोर्डर पर स्थित पिसोल गांव में प्राचीन माँ सरस्वती मंदिर परिसर में लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समय में हरियाणा सरस्वती हरिटेज बोर्ड का गठन हुआ था। उस वक्त सरस्वती में केवल 10 किलोमीटर मे ही पानी चलता था। यह नदी विलुप्त होने के कागार पर थी। पिछले 10 वर्षों के अथक प्रयासों से आज सरस्वती नदी में 400 किलोमीटर में पानी बह रहा है। सरस्वती हरिटेज बोर्ड का मकसद सरस्वती नदी का उत्थान ओर पुनर्जीवित करना है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी सरस्वती नदी को लेकर समय-समय पर फीडबैक लेते रहते है और इन स्थानों के विकास के लिए करोड़ों रूपये के बजट को आबंटित करते है। यह माँ सरस्वती मंदिर ्लका ऐतिहासिक स्थान है। इस स्थान पर सरस्वती नदी बहती रही है, पुराने समय में यहां पर लोग अपने परिजनों के अंतिम संस्कार करने के बाद उनके पिंड दान करने आते थे। लोगों की आस्था और सुविधा को देखते हुए इस पद्धति को दोबारा विकसित किया जाएगा। लोगों की इस मंदिर के प्रति काफी आस्था है। इस क्षेत्र में बड़े-बडे़ ऋषि मुनियों ने तपस्या की थी, जिनकी वजह से यह क्षेत्र पावन बना है। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में महाभारत के समय श्री बलराम जी युद्ध में शामिल न होकर उन्होंने द्वारका से लेकर आदिबद्री तक सरस्वती की यात्रा की थी। यह वर्णन सभी ग्रंथो में आता है। उन्होंने इस पदयात्रा के दौरान इस क्षेत्र को देखा था, यहां पर श्री बलराम जी ने महायज्ञ किया था, ताकि इस क्षेत्र में शांति बनी रहे। इस मंदिर में भगवान श्री विष्णु जी की मूर्ति लगभग 1400 वर्ष पुरानी है। उन्होंने कहा कि महाभारत कालीन युद्ध के दोरान भगवान श्री कृष्ण ने 48 कोस की परिधि में चार यक्षों की डयूटी लगाई थी, जिनमें एक यक्ष इस क्षेत्र में थे। उन्होंने कहा कि समिति द्वारा बोर्ड के सभी सदस्यों को आमंत्रित किया गया था। समिति द्वारा जो-जो जिम्मेदारियां उन्हें दी गई हैं, उनको जल्द पूरा करवाया जाएगा। इस मंदिर पर लगभग नौ लाख रुपये की लागत से घाट बनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त मंदिर की एक परिक्रमा ओर बनाई जाएगी। विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा शैड का निर्माण किया जाएगा ताकि इसका उपयोग आयोजित होने वाले भंडारे व अन्य कार्यक्रमों के लिए किया जा सके। इस मौक पर डीडीपीओ रितु लाठर, भाजपा अभिनेत्री शैली मुंजाल के अलावा अन्य समिति के सदस्यगण व ग्रामीण मौजूद रहे।
