AI के जरिए एडिट की गई फोटो/वीडियो से हो सकती है साइबर ठगीः एसपी
तकनीक के इस आधुनिक युग में जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और संचार क्षेत्र में नई क्रांति ला रहा है, वहीं साइबर अपराधी इस तकनीक का दुरुपयोग कर आमजन को ठगने व ब्लैकमेल करने में भी जुट गए हैं। इसी संदर्भ में जिला पुलिस अधीक्षक उपासना ने नागरिकों को जागरूक करते हुए सावधानी बरतने की महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। एसपी उपासना ने बताया कि साइबर ठग अब एआई टूल्स की मदद से किसी व्यक्ति की आवाज़, चेहरा या वीडियो को इतनी बारीकी से एडिट कर रहे हैं कि असली और नकली में अंतर कर पाना मुश्किल हो गया है। इन नकली वीडियो या डीपफेक कंटेंट के माध्यम से लोगों से पैसे की ठगी, प्रतिष्ठा खराब करने की धमकी या सोशल मीडिया पर ब्लैकमेलिंग जैसे अपराधों में तेजी आई है। उन्होंने कहा कि अपराधी किसी व्यक्ति की पुरानी फोटो या वीडियो को एआई टूल से एडिट कर अशोभनीय या भ्रामक कंटेंट तैयार करके और फिर उसे वायरल करने या ऑनलाइन पोस्ट करने की धमकी देकर रुपयों की मांग करते है। इसी प्रकार कुछ अपराधी सोशल मीडिया से ली गई तस्वीरों को एडिट कर फेक प्रोफाइल बनाकर लोगों से पैसे ठगने या आपत्तिजनक बातें फैलाने का प्रयास करते हैं। एसपी ने बताया कि अब ठग “डीपफेक वॉइस” तकनीक का उपयोग कर परिवार के सदस्य या वरिष्ठ अधिकारी की आवाज की नकल करके भी ठगी कर रहे हैं। जैसे – किसी व्यक्ति को फोन कर कहा जाता है कि “मैं तुम्हारा रिश्तेदार बोल रहा हूँ, तुरंत पैसे भेजो” और आवाज़ इतनी समान होती है कि सामने वाला व्यक्ति धोखे में आ जाता है।
एसपी उपासना ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि –
1. किसी भी संदिग्ध वीडियो या फोटो पर तुरंत भरोसा न करें, भले ही उसमें परिचित व्यक्ति नजर आ रहा हो।
2. निजी फोटो, वीडियो या व्यक्तिगत जानकारी सोशल मीडिया पर अपलोड करने से पहले सोचें।
3. यदि किसी प्रकार की संदिग्ध कॉल, वीडियो या धमकी प्राप्त हो तो उसे पुलिस या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत रिपोर्ट करें।
4. डीपफेक पहचाने और संदिग्ध सामग्री की सत्यता जांचें।
5. बच्चों व युवाओं को सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग के बारे में जागरूक करें।
6. फेक प्रोफाइल की पहचान होने पर तुरंत उसे रिपोर्ट करें।
एसपी ने कहा कि तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ लोगों को भी डिजिटल विवेक अपनाने की आवश्यकता है। किसी भी संदिग्ध लिंक, वीडियो, कॉल या मैसेज पर क्लिक करने या शेयर करने से पहले उसकी सत्यता जांच लें। यदि कोई बात या वीडियो बहुत सनसनीखेज या चौंकाने वाली लगे, तो सबसे पहले उसे सत्यापित करें, क्योंकि ठग इसी भावनात्मक प्रतिक्रिया का फायदा उठाते हैं।
