जहर मुक्त भोजन के लिए प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाएं किसान : राज्यपाल आचार्य देवव्रत
गुजरात एवं महाराष्ट्र के महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि अत्यधिक रासायनिक उपयोग की वजह से खेती में दिन प्रतिदिन खर्चे बढ़ रहे हैं। यही नहीं इसके कारण कैंसर के अलावा अनेक गंभीर बीमारियां पैदा हो रही है। इसको रोकने के लिए हमें प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाने होंगे, जिससे हमारी फसल की पैदावार भी अच्छी होगी और हम जहर मुक्त खाना खा पाएंगे।
माननीय राज्यपाल आचार्य देवव्रत सोमवार को गांव गोविंदपुरा में आयोजित प्राकृतिक खेती एवं शहीद उधम सिंह चौक का शिलान्यास कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थितगण को अपना संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में पहुंचने पर शहीद उधम सिंह इंटरनेशनल फाउंडेशन के पदाधिकारियों, ग्रामीणों द्वारा उनका स्वागत किया गया। इसके बाद राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने गांव गोविंदपुरा में शहीद उधम सिंह चौक का शिलान्यास किया।
आचार्य देवव्रत ने कहा कि शहीद उधम सिंह ने जिस तरह से साहस दिखाते हुए विदेश में जाकर अंग्रेज जनरल डायर को मौत के घाट उतारा था। जनरल डायर ने जलियांवाला कांड किया था और निहत्थे लोगों पर गोलियां बरसवाई थी। शहीद उधम सिंह जैसे देशभक्तों की कुर्बानियों की वजह से हम आज खुली हवा में सांस ले रहे हैं। उनके अंदर देशभक्ति की भावना कूट कूट कर भरी हुई थी। गोविंदपुरा में शहीद उधम सिंह चौक बनाया जाएगा, इससे युवाओं में देशभक्ति की भावना ओर अधिक प्रबल होगी।
उन्होंने कहा कि पहले उत्तम खेती हुआ करती थी, किसान अपनी मेहनत और पसीने से फसल उगाता था। परिवार मिट्टी में मिलकर सोना उगाता है। लेकिन किसानों को ओलावृष्टि, तूफान आदि आपदाओं का सामना भी करना पड़ता है, इसके बावजूद भी किसान संतोषी है। सीवन क्षेत्र में किसान सब्जी की ओर अपने कदम बढ़ा रहे हैं, जिसके लिए सभी को बधाई देता हूं। आज के समय खेती में खर्चे दिन प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। रासायनिक खादों का उपयोग बहुत ज्यादा मात्रा में किया जा रहा है। जिसकी वजह से धरती बंजर हो रही है। जंगल की भूमि बड़ी उपजाऊ होती है, क्योंकि इसमें मानव के कदम नहीं पड़े। अढ़ाई किले में 13 किलो नाइट्रोजन डालना होता था, लेकिन लोग 5-5 कट्टे तक एक एकड़ में डालते हैं और इसकी संख्या 20 कट्टों तक प्रति एकड़ पहुंच रही है।
उन्होंने कहा कि किसान को अब अपनी जमीन और फसल अच्छी करने के लिए प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना होगा। केंचुआ यानि की मित्र किट का खेतों में होना आवश्यक है, लेकिन अब यह जमीनों से गायब हो गए हैं। कुछ किसान जैविक खेती कर रहे हैं, लेकिन यह भी इतनी किफायती नहीं है। प्राकृतिक खेती करेंगे तो हम अपनी बंजर होती हुई भूमि को बचा पाएंगे। इसका जीता जागता उदाहरण कुरूक्षेत्र गुरूकुल में है, जहां 200 एकड़ प्राकृतिक खेती की जा रही है। हमें जहर वाली खेती से मुक्ति पानी है, तो इसके लिए किसान गुरूकुल में प्रशिक्षण लें और प्राकृतिक खेती शुरू करें।
उन्होंने किसानों को वीडियो के माध्यम से दिखाया कि किस तरह से एक अखबार की रिपोर्ट में आया है कि मांओं के दूध की जांच की गई, जिसमें यूरिया और कीटनाशक पाया गया, जोकि मानव जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा है। कैंसर जैसी बीमारियां पनप रही है। पानी दुषित, अनाज जहर और हवा प्रदूषित हो चुकी है। इस स्थिति से निपटने के लिए हम सबको मिलकर कार्य करना होगा और प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाने होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने देश व प्रदेश में प्राकृतिक खेती को एक मिशन का रूप दिया जा रहा है। सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती करने वालों को प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।
ऐसे तैयार करें देशी खाद
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के लिए हमें देशी गाय का गोबर, मूत्र, गुड़, दाल की बेसन, पेड़ के नीचे की मिट्टी को ड्रम में मिलाकर उन्हें 6 दिन तक रखना है। एक ग्राम देशी गाय के गोबर में लगभग 300 करोड़ बैक्टीरिया होते हैं। तीस दिन में 30 किले की खेती एक देशी गाय के गोबर और मूत्र से की जा सकती है। यह मित्रकिट धरती की गुणवत्ता बढ़ाएंगे। गुजरात में लाखों किसानों ने प्राकृतिक खेती को अपनाया है। इस मौके पर राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने सरदार गज्जन सिंह द्वारा शहीद उधम सिंह पर सुनाम से लंदन तक विषय पर लिखी पुस्तक का विमोचन भी किया।
इस अवसर पर ये रहे मौजूद
इस मौके पर कार्यक्रम आयोजक सरदार गज्जन सिंह, नगर पालिका की चेयरपर्सन रेखा रानी, पूर्व सांसद पटियाला प्रेम सिंह चंदु माजरा, कंवल जीत कौर ने भी अपना संबोधन दिया। इस अवसर पर शहीद उधम सिंह के पोते जीत सिंह, मंजीत कौर, पैरा एशियन गेम्स के गोल्डमेडलिस्ट तीरंदाज सरदार हरविंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, मीना कंबोज, अमरीक सिंह, स. हरजिंद्र सिंह, मास्टर सुरेंद्र सिंह, सरपंच प्रतिनिधि मलकित सिंह, ओमप्रकाश कंबोज, वेद कंबोज, अमरेंद्र सिंह, तरसेम सिंह मांजला, होशियार चंद, खुशहाल सिंह, तीरथ राम कंबोज, सबेर सिंह, अंगे्रज सिंह, रणधीर सिंह, लखविंद्र सिंह, हरजिंद्र सिंह कंबोज, नरेंद्र सिंह के अलावा क्षेत्र के किसान मौजूद रहे।
