आज भी इस गांव में वही पुरानी परंपरा
कैथल। गांव हरसौला में पुरानी संस्कृति आज भी देखने को मिली। जिस तरह वर्षों पहले बड़े-बुजुर्ग तीज-त्यौहार मनाते थे। ठीक उसी का तरह आज भी हरसौला गांव की महिलाएं एक जगह इक_ी होती है और त्यौहारों का आनंद उठाती है। जहां आज हम चका-चौंद की दुनिया में पुरानी संस्कृति को भुलते जा रहे हैं। पहले हर गांव व शहर में मकर सक्रांति के दिन सभी इक_े होकर एक साथ खेलते थे, महिलाएं गिद्दा गाकर नाच-गाना करती थी। लेकिन धीरे-धीरे जमाना बदल रहा है। लेकिन कैथल जिले का गांव हरसौला एक जीता-जागता उदाहरण है। आज भी मकर सक्रांति पर पूरे गांव की महिलाएं एक जगह इक_ी हुई। सभी ने नाच-गाकर संक्राति के पर्व की शुभकामनाएं दी। गीतों ने महिलाओं ने नाच-गाकर पुराने संस्कृति को उजागर किया।
