मृत्यु के बाद भी दो लोगों की जिंदगी में उजाला कर गई आशा रानी
कैथल, 16 जनवरी : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्रीय प्रचारक जतिन कुमार की माता आशा रानी का 84 साल की उम्र में वीरवार को निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रही थी। परिजनों ने आशा रानी की मृत्योपरांत उनके नेत्रदान किए हैं। आशा रानी के जाने के बाद भी उनकी आंखें इस दुनिया में जिंदा रहे कर दो लोगों के जीवन को रोशन करने का काम करेंगी। सेवा संघ नेत्र बैंक की टीम ने मौके पर पहुंच कर नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की।
प्रचारक जतिन कुमार के भाई नरेश चुघ ने बताया कि उनकी माता आशा रानी पिछले कुछ समय से बीमार चल रही थी। बीमारी के चलते वीरवार को उनका निधन हो गया। वे 84 साल की थी। उन्होंने बताया कि उनकी माता आशा रानी की इच्छा थी कि उनके देहांत के बाद उनके नेत्र दान किए जाएं ताकि उनकी मृत्यु के बाद उनकी आंखें किसी जरुरतमंद के जीवन में रोशनी कर सकें। नरेश चुघ ने बताया कि अपनी माता की इस इच्छा को पूरा करने के लिए उन्होंने उनके नेत्र दान किए हैं। वे अपने पीछे उनके अलावा उनके बड़े भाई अशोक चुघ, छोटे भाई जतिन चुघ, पुत्र वधुओं, बहन मधु मेहता सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गई हैं। सेवा संघ नेत्र बैंक से आए अशोक भारती, मदन खुराना सहित डा. दीपक कुमार व अन्य टीम ने नेत्रदान प्रक्रिया के बाद कहा कि नेत्रदान महादान है। सभी को मृत्योपरांत नेत्रदान करने चाहिएं। बुजुर्ग आशा रानी व परिजनों की इच्छानुसार उनकी आंखें अब किसी ओर की दुनिया को रोशन करेंगी। आशा रानी के निधन पर प्रदेशभर से गणमान्य लोगों ने शोक जताया है।
