डीसी ने खेत में जाकर किसानों से जानी ग्राउंड स्तर की चुनौतियां

किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से डीसी प्रीति ने सांघन गांव के खेत का दौरा किया। उन्होंने खेत में फसल अवशेष प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया का जायजा लिया और कृषि विभाग द्वारा आयोजित लाइव डेमो देखा। उन्होंने किसानों से सीधे बातचीत की और ग्राउंड स्तर की चुनौतियां जानी।

          डीसी ने किसान द्वारा अपनाई जा रही पराली प्रबंधन में अपनाई जा रही विभिन्न प्रकार की मशीनों की क्रियाओं को बारीकी से देखा। इस दौरान डीसी ने स्वयं किसानों एवं कृषि अधिकारियों से इस प्रक्रिया के लाभों और आने वाली चुनौतियों के बारे में पूछा। कृषि अधिकारियों ने उन्हें बताया कि कैसे सुपर सीडर, एमबी प्लो, कटर, बेलर, हे-रैक जैसी विशेष मशीनों का उपयोग करके धान की पराली को खेत में ही मिला दिया जाता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। इसके साथ ही अवशेष के बेलस (गांठ) बनाकर विभिन्न उद्योगों को भी बेच सकते हैं। इससे एक ओर जमीन की उर्वरा शक्ति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, वहीं किसान की आमदनी भी बढ़ती है। उन्होंने सांघन गांव के किसानों के प्रयास की सराहना की और अन्य किसानों से भी इस तकनीक को अपनाने की अपील की।

          इस मौके पर किसानों ने पराली प्रबंधन में आने वाली आर्थिक और तकनीकी दिक्कतों के बारे में बताया। डीसी ने उन्हें आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन इन चुनौतियों को दूर करने के लिए उचित मैकेनिजम तैयार करेगा, ताकि सभी किसानों को कस्टम हायरिंग सेंटर से सही समय पर मशीनें उपलब्ध करवाई जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे किसानों को सब्सिडी और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के लिए तेजी से काम करें। डीसी प्रीति के सहज स्वभाव व पर्यावरण के प्रति उनकी चिंता को देख कर किसान काफी संतुष्ट दिखाई दिए और उन्होंने वादा किया कि वे फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति ओर किसानों को भी जागरूक करेंगे।

          कृषि एवं किसान कल्याण विभाग कैथल के उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद ने डीसी प्रीति को फसल प्रबंधन में प्रयोग होने वाली विभिन्न मशीनों की उपलब्धता के बारे में जानकारी दी और कहा ग्राम स्तर की सभी टीमें एक्टिव मोड में काम कर रही हैं। एक ओर जहां किसानों को जागरूक कर रही हैं, वहीं निगरानी भी रख रही हैं। इस अवसर पर एसडीओ सतीश नारा व जगदीश चंद्र सहित अन्य कृषि अधिकारी भी मौजूद रहे। 

फसल विविधीकरण की सलाह

 डीसी ने किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि धान और गेहूं के पारंपरिक चक्र से बाहर निकलकर गन्ना और सब्जियों जैसी अन्य फसलें उगाना फायदेमंद हो सकता है। इससे न सिर्फ मिट्टी की सेहत सुधरेगी, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। डीसी ने कहा कि फसल विविधीकरण अपनाकर किसान अपनी आय के स्रोतों को बढ़ा सकते हैं और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं।

फिजी वायरस के अटैक से प्रभावित खेत का किया दौरा

डीसी प्रीति ने गांव हरिपुरा के फिजी वायरस के अटैक से प्रभावित किसान के खेत का दौरा किया और एसडीएम को निर्देश दिए कि वे इनका केस बनाकर मुख्यालय भिजवाए, ताकि सरकार द्वारा नियमानुसार मुआवजा दिलाया जा सके।

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