किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में करें जागरूक : डीडीए

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. सुरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि वायु गुणवता आयोग भारत सरकार व माननीय उच्च न्यायलय के आदेशानुसार आगामी गेंहू कटाई के सीजन में आगजनी की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियों शुरू कर दी हैं। इसके लिए गत 8 दिसंबर को सयुंक्त निदेशक (कृ0अ0) हरियाणा पंचकुला द्वारा भी राज्य के सभी सहायक कृषि अभियन्ताओं की बैठक बुलाई गई, जिसमें आगामी सीजन में फसल अवशेषों में आगजनी की घटनाओं पर पूर्ण रूप से रोक के लिए व्यापक कार्य योजना तैयार करने पर चर्चा की गई। सभी फिल्ड अधिकारियों को अभी से तैयारियों शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। कैंप लगाकर किसानों को जागरूक करें। उन्होंने बताया कि जिले में लगभग 4 लाख 20 हजार एकड़ में गेंहू की बिजाई की गई है, जिसमें लगभग 6 लाख 75 हजार मीट्रिक टन फसल अवशेष का उत्पादन होता है। इसका प्रबन्धन किसान स्ट्रा रीपर मशीन से तुड़ी बनाकर करते है, जिसका उपयोग पशुओं के चारे के लिए किया जाता है, जोकि पशुओं के लिए अच्छा चारा माना जाता है। कुछ किसान स्ट्रा रीपर से तुड़ी बनाने के बाद मेढों पर बचे हुए अवशेषों मे आग लगा देते है, जिससे वातावरण प्रदुषित होता है और भूमि की उर्वरा शक्ति कमजोर होती है, वहीं जान माल के नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए सभी किसान फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करके अपनी आय बढ़ाएं। सहायक कृषि अभियन्ता इंजीनियर जगदीश मलिक ने बताया कि गेंहू के अवशेषों के प्रबन्धन के लिए किसानों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। किसानों को इससे होने वाले नुकसान के बारे में ज्यादा से ज्यादा सजग करने के लिए कहा गया है। संयुक्त निदेशक इंजीनियर जगमिन्द्र नैन ने बताया कि सीएक्यूएम के आदेशानुसार यदि कोई किसान गेंहू के फानों में आग लगाता पाया गया तो उनके खिलाफ 5 हजार रुपये से 30 हजार रूपये तक का जुर्माना, एफआईआर व मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर रेड एंट्री की जाएगी, जिससे वह किसान दो वर्ष तक अपनी फसल एमएसपी पर नहीं बेच पायेगा। 

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *