जनगणना के नाम पर साइबर ठगी से सावधान रहें : एसपी मनप्रीत

जिला पुलिस अधीक्षक मनप्रीत सिंह सूदन ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि वर्तमान समय में जनगणना प्रक्रिया को लेकर साइबर ठग सक्रिय हो गए हैं। ठग विभिन्न तरीकों से लोगों को फोन कॉल, मैसेज अथवा सोशल मीडिया माध्यमों के जरिए अपने जाल में फंसाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में लोगों को सतर्क और जागरूक रहने की आवश्यकता है। एसपी ने बताया कि कई मामलों में साइबर अपराधी स्वयं को सरकारी कर्मचारी, जनगणना अधिकारी अथवा बैंक प्रतिनिधि बताकर लोगों से संपर्क करते हैं। इसके बाद वे आधार नंबर, बैंक खाता जानकारी, एटीएम कार्ड विवरण, ओटीपी तथा अन्य निजी जानकारी मांगते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी सरकारी जनगणना प्रक्रिया में नागरिकों से बैंक खाते की जानकारी या मोबाइल पर आए ओटीपी की मांग नहीं की जाती। यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की जानकारी मांगता है तो समझ जाएं कि वह साइबर ठगी करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी लोगों की छोटी सी लापरवाही का फायदा उठाकर बैंक खातों से रकम निकाल लेते हैं। इसलिए किसी भी अनजान कॉल, लिंक या मैसेज पर भरोसा न करें। मोबाइल फोन पर आए किसी भी ओटीपी, पासवर्ड, यूपीआई पिन या बैंकिंग जानकारी को किसी के साथ साझा न करें। इसके अलावा किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से भी बचें। एसपी मनप्रीत सिंह सूदन ने कहा कि आजकल ठग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नकली वेबसाइट और फर्जी एप्लीकेशन बनाकर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। कई बार लोगों को यह कहकर डराया जाता है कि यदि उन्होंने जानकारी साझा नहीं की तो उनका नाम जनगणना सूची से हट जाएगा या सरकारी सुविधाएं बंद हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें तथा केवल सरकारी और विश्वसनीय स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें। उन्होंने अभिभावकों और बुजुर्गों से भी विशेष सतर्कता बरतने की अपील करते हुए कहा कि साइबर अपराधी अक्सर बुजुर्गों और कम तकनीकी जानकारी रखने वाले लोगों को निशाना बनाते हैं। परिवार के सदस्य अपने घर के बुजुर्गों को साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूक करें ताकि वे किसी भी प्रकार की ठगी का शिकार न हों। एसपी ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर धोखाधड़ी होती है तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करवाएं अथवा साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत करें। समय रहते शिकायत करने पर ठगी गई राशि को रोके जाने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त नजदीकी पुलिस थाना या साइबर सेल में भी संपर्क किया जा सकता है।

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