चंडीगढ़ में शिक्षा विभाग की प्रदेश स्तरीय समीक्षा बैठक में बेस्ट प्रैक्टिस मॉडल बना कैथल का स्टम्बल लैब प्रोजेक्ट
हरियाणा सचिवालय चंडीगढ़ में बुधवार को स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक हरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इसमें कैथल जिले की अभिनव शैक्षणिक पहल स्टंबल लैब को बेस्ट प्रैक्टिस मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसकी सभी अधिकारियों ने सराहना की। शिक्षा मंत्री एवं शिक्षा विभाग ने प्रदेश के अन्य जिलों को भी इस मॉडल को अपनाने और लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में सुधार लाया जा सके। इस बैठक में माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक जितेंद्र दहिया, कैथल डीसी अपराजिता, स्टेट प्रोजेक्ट निदेशक हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना वर्षा खंगवाल, संयुक्त निदेशक हरप्रीत कौर, डा. मयंक वर्मा, सीएमजीजीए दिव्यता, जिला शिक्षा अधिकारी सुभाष कुमार, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी प्रमोद राणा, सुशील कुमार, छतरपाल, नरेश कुमार, निर्मल सिंह, राममेहर और संदीप शर्मा सहित प्रदेश के जिला शिक्षा अधिकारियों ने भाग लिया। बता दें कि स्टम्बल लैब पहल की संकल्पना डीसी अपराजिता द्वारा की गई थी, जिसका शुभारंभ हाल ही में शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, पूंडरी में किया था। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को प्रदेश के सभी जिलों में लागू करने की घोषणा की थी। जिसको लेकर अब काम शुरू हो गया है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में असफलता के डर को दूर करते हुए जिज्ञासा, आत्मविश्वास, मानसिक दृढ़ता और स्वतंत्र सोच को बढ़ावा देना है। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने इस परियोजना की परिकल्पना और सफल क्रियान्वयन के लिए कैथल डीसी अपराजिता की सराहना की। प्रदेश स्तरीय बैठक में प्रोजेक्ट की विस्तृत जानकारी देते हुए डीसी अपराजिता ने बताया कि यह पहल रटने वाली शिक्षा प्रणाली से आगे बढ़कर प्रैक्टिकल आधारित शिक्षा पर केंद्रित है। इसके तहत विद्यार्थियों को सरल भौतिक विज्ञान प्रयोग, अनुमान आधारित गतिविधियां तथा मानसिक क्षमता और रचनात्मक सोच को बढ़ाने वाली गतिविधियों में शामिल किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि विद्यार्थियों की भागीदारी और कक्षा में उनकी सक्रियता को मापने के लिए एक विशेष क्यूरियोसिटी इंडेक्स भी लागू किया जाएगा। डीसी अपराजिता ने कहा कि प्रत्येक बच्चे में विशेष प्रतिभा होती है और यह पहल बच्चों को किसी कार्य में असफल होने के बाद भी आत्मविश्वास एवं मानसिक मजबूती के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। इस प्रोजेक्ट को को बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के, स्कूलों के मौजूदा संसाधनों और आधारभूत ढांचे का उपयोग करते हुए लागू किया गया है।
